निर्माणी पर

                    धातु एवं इस्‍पात निर्माणी, ईशापुर मिलिटरी हार्डवेयर हेतु आधारभूत लौह एवं अलौह कच्‍चे माल का मुख्‍य उत्‍पादक है.

                    आधुनिक मिलिटरी हार्डवेयर के लिए मजबूत एवं उच्‍च श्रेणी की कठोर धातु की आवश्‍यकता होती है. इन दोनो गुणधर्मों के लिए सुपर अल्‍ट्रा क्‍लीन प्रकार के मिश्र इस्‍पात की जरूरत पड़ती है.

                    एम.एस.एफ में इलेक्ट्रिक आर्क फरनेस, लैडल फरनेस वैक्‍यूम डिगैसिंग एवं इलेक्‍ट्रो स्‍टील रीमेल्टिंग के रुप में अत्‍याधुनिक स्‍टील बनाने की सुविधा है जिससे अल्‍ट्रा क्‍लीन इस्‍पात का उत्पादन सुनिश्चित होता है.

                    पूर्णतया इन्‍टीग्रेट एवं डबल मैनीपुलेटर युक्‍त उच्‍च क्षमता पी.एल.सी नियं‍त्रित 2650 टन फोर्जिंग प्रेस गन बैरल एवं तोपों के अन्‍य अवयवों तथा टैंक गन जैसे उत्‍पादों को आकार देता है.

                    1250 टन का अत्‍याधुनिक, निर्माणी में लौह एवं अलौह सामग्री के पतले पट्टी बनने के लिए ऑनलाइन एक्‍स-रे एवं मेकनिकल गॉजिंग प्रणाली युक्‍त एक हॉट रोलिंग मील, एक बेहद सूक्ष्‍म 2 hi/4hi युक्‍त कोल्‍ड रोलिंग मील ( 2006 में स्‍थापित) है.

                    हीट ट्रीटमेंट की सुविधा धातु में उच्‍च मशीनी गुण प्रदान करता है जिससे यह उच्‍च दबाव की स्थिति में भी अच्‍छा कार्य करने की क्षमता रखता है.

                    इस प्रकार की उत्‍कृष्‍ट अल्‍ट्रा क्‍लीन मिश्र धातु इस्‍पात को बनाने, आकार देने एवं संसाधित करने की सुविधा के कारण ही किसी भी प्रकार की धातुकर्मीय आवश्‍यकता को पूरा कर पाना इसके लिए सम्‍भव हो पाता है.

                    उत्‍पादों को अंतिम रुप देने के लिए डीप ड्राइंग प्रकार के इस्‍पात ( एच.एस.एल.ए ग्रेड) से लेकर इस्‍पात काट्रिज केस का उत्‍पादन निर्माणी की प्रमुख शक्ति है. इस क्षेत्र में यह निर्माणी अग्रणी है.

                    इलेक्ट्रिक इनडक्‍शन ब्रास मेल्टिंग फरनेस 60:40 लेड ब्रास युक्‍त/विहिन बिलेट्स/पिग्‍स, मैंगनीज ब्रास आदि का उत्पादन करता है.

                    यहॉं कुशल कर्मियों के साथ-साथ अल्‍ट्रासोनोग्राफी, रासायनिक परीक्षण प्रयोगशाला ,कम्‍प्‍यूटर युक्‍त स्‍पेक्‍ट्रोग्राफिक, एक्‍स आर एफ स्‍पेक्‍ट्रोमेट्री, हाइड्रोजन गैस विश्‍लेषक एवं सूक्ष्‍म आयामी मापन के लिए त्रीआयामी संयोजक आदि जैंसे अत्‍याधुनिक मशीन उपलब्‍ध हैं.

 

 

स्थितिः

एवइस्‍ िी, ईश पशि ें लके 28 ि0ी0 गली (ा) नदि पर ि ै. यह एवसड ों ों ़ा ै. नजदहव अड चन्‍ हव अडा, दमदम ै.

 

ऐतिहासिक पृष्‍ठभूमिः

यह िगन एव ्‍टरएक ें रचि उस समय सन् 1872 ें उण्‍एव ्‍टर ी. यहॉं आरम्‍ ें रत िं एविं ें कर रचलन िगया. इसक सन् 1892 ें यहॉं जब ओपन यन्‍ िगययहॉं पर इस्‍ उत्‍दन . इसक रत ें सरवपरथम रमि इस्‍ उत्‍दन रम्‍ िगया. ्‍ िं ों ्‍पन ें सन् 1896 ें . कर कलों और अधि ि्‍रण कर यन्‍ ईश ें ्‍्‍तरि करनआवश्‍यकतपड़ी. सन् 1905 ें ईश मक नए ्‍ ें नस्‍पन यह िगन एव ्‍टरएक ें करतरही. सन् 1920 ें यह आय िपरि ें एक ्‍वत इक बनऔर तभइसएवइस्‍ िी, ईश गया .

 

धातु एवं इस्‍पात निर्माणी भारत में मिलीटरी मेटलर्जी का उद्गम रहा है. उत्‍पादों के विकास तथा संलग्‍न निरीक्षणालयों द्वारा असफलताओं की जॉंच के लिए उपलब्‍ध सुविधाओं तथा विशेषज्ञताओं की वजह से ही सन् 1951 में यहॉं तकनीकी विकास स्‍थापना (धातु) का गठन हुआ जो सन् 1956 में रक्षा धातुकर्मीय अनुसंधान प्रयोगशाला ( डी.एम.आर.एल) के रुप में जाना गया. डी.एम.आर.एल को बाद में सन् 1963 में हैदराबाद स्‍थानान्‍तरित किया गया जब यह डी.एम.आर.एल.और सी.आई (धातु) के रुप में विभक्‍त हुआ.